Indu kumari

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लिख दे

लिख दे 

ले ले तू कागज कलम, क्यूं हो रही उदास। 
लिख दे जो ह्रदय जगी, हे सखि मन के प्यास। 

रहे निराशा में मगन, कर आशा की खोज। 
आशाएं ही जिन्दगी, आशा मय हो रोज।

 मन की सुंदर कल्पना, करें भविष्य उजास। 
तू हंसने का कर जरा, कोई मधुर प्रयास।

आशा सुंदर भोर है विकल निराशा रात। 
जीवन में रखे उदय, सुंदर सुखद प्रभात।

 जीवन तो आनंद है, इसे भोगिये आप ।
जीवन कलुषित ना करें, कर मन में संताप।

उत्सव जैसी जिंदगी, प्रणय प्यार संवाद ।
क्यों तू दुख का रूप दे ,कर नित नए विवाद।

 आ राही तू प्रेम पथ,देता है आवाज।
फूलों कलियों से भरा, आ जा तेरे काज।

जीवन हो एक प्रार्थना, दुआ करूंगी आज। 
इन्दु समर्पित हो रही, जन समाज के काज।
      डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार

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6 Comments

Gunjan Kamal

01-Mar-2023 08:45 AM

बहुत सुंदर

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Abhinav ji

23-Feb-2023 08:43 AM

Very nice 👍

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बहुत खूब

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